Self Respect Shayari in Hindi: आत्मसम्मान, खुद्दारी और उसूलों पर 20 दिलकश शायरी
आत्मसम्मान इंसान का वह आंतरिक गहना है जिसे किसी भी कीमत पर बेचा या दांव पर नहीं लगाया जा सकता। जब आप अपनी कद्र करना सीख जाते हैं, तो आप उन जगहों पर रुकना बंद कर देते हैं जहाँ आपकी मौजूदगी का कोई मोल नहीं होता। खुद्दारी से जीना थोड़ा कठिन ज़रूर होता है, मगर यह इंसान को एक ऐसा सुकून और गरिमा बख्शता है जो दुनिया की तमाम दौलतों से बढ़कर है।
सेल्फ रिस्पेक्ट शायरी उन स्वाभिमानी दिलों के लिए है जो भूखे पेट सोना पसंद करेंगे, लेकिन किसी के आगे हाथ फैलाना या अपनी गरिमा गिराना गवारा नहीं करेंगे। 'Self Respect Shayari' का यह संकलन आपके आत्मसम्मान और खुद्दारी को एक नई मजबूती और दिशा प्रदान करेगा।
इश्क़ अपनी जगह है और आत्मसम्मान अपनी जगह,
जहाँ इज़्ज़त न मिले, हम उस महफ़िल को ठोकर मार देते हैं।
इश्क़ अपनी जगह है और आत्मसम्मान अपनी जगह,
जहाँ इज़्ज़त न मिले, हम उस महफ़िल को ठोकर मार देते हैं।
हम झुकते सिर्फ खुदा के आगे हैं अपने सजदों में,
दुनिया के किसी इंसान के आगे झुकना हमारे उसूलों में नहीं।
हम झुकते सिर्फ खुदा के आगे हैं अपने सजदों में,
दुनिया के किसी इंसान के आगे झुकना हमारे उसूलों में नहीं।
प्यार में हम जान भी दे सकते हैं,
मगर अपनी खुद्दारी का सौदा कभी नहीं कर सकते।
प्यार में हम जान भी दे सकते हैं,
मगर अपनी खुद्दारी का सौदा कभी नहीं कर सकते।
जो हमारी मौजूदगी की कद्र नहीं करना जानते,
हम उन्हें अपनी गैर-मौजूदगी का तोहफा देकर रुखसत कर देते हैं।
जो हमारी मौजूदगी की कद्र नहीं करना जानते,
हम उन्हें अपनी गैर-मौजूदगी का तोहफा देकर रुखसत कर देते हैं।
किसी के पीछे बार-बार गिड़गिड़ाने से बेहतर है,
कि अपनी तन्हाई में पूरी शान और स्वाभिमान से जिया जाए।
किसी के पीछे बार-बार गिड़गिड़ाने से बेहतर है,
कि अपनी तन्हाई में पूरी शान और स्वाभिमान से जिया जाए।
हमने अपने उसूलों को कभी किसी फायदे के लिए नहीं बदला,
हम वो हैं जो भूखे रहकर भी अपनी गैरत ज़िंदा रखते हैं।
हमने अपने उसूलों को कभी किसी फायदे के लिए नहीं बदला,
हम वो हैं जो भूखे रहकर भी अपनी गैरत ज़िंदा रखते हैं।
रिश्ता कितना भी गहरा क्यों न हो हमारे लिए,
जहाँ आत्मसम्मान पे आंच आए, हम रिश्ता वहीं खत्म कर देते हैं।
रिश्ता कितना भी गहरा क्यों न हो हमारे लिए,
जहाँ आत्मसम्मान पे आंच आए, हम रिश्ता वहीं खत्म कर देते हैं।
हमारी खामोशी हमारी समझदारी का सबूत है,
मगर जब गैरत पे बात आए तो हम बोलना भी जानते हैं।
हमारी खामोशी हमारी समझदारी का सबूत है,
मगर जब गैरत पे बात आए तो हम बोलना भी जानते हैं।
हम किसी की मेहरबानी के साए में नहीं पलते,
हम जो भी हैं, अपनी मेहनत और आत्मसम्मान के दम पे हैं।
हम किसी की मेहरबानी के साए में नहीं पलते,
हम जो भी हैं, अपनी मेहनत और आत्मसम्मान के दम पे हैं।
जो हमें विकल्प समझकर इस्तेमाल करना चाहते हैं,
हम उन्हें अपनी ज़िंदगी से हमेशा के लिए डिलीट कर देते हैं।
जो हमें विकल्प समझकर इस्तेमाल करना चाहते हैं,
हम उन्हें अपनी ज़िंदगी से हमेशा के लिए डिलीट कर देते हैं।
खुद्दारी का यह ज़ेवर हमने विरासत में पाया है,
इसे किसी की झूठी मोहब्बत की खातिर नहीं गँवा सकते।
खुद्दारी का यह ज़ेवर हमने विरासत में पाया है,
इसे किसी की झूठी मोहब्बत की खातिर नहीं गँवा सकते।
हम वो चिराग़ हैं जो आंधियों में भी अपनी लौ को ऊँचा रखते हैं,
हमें किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं।
हम वो चिराग़ हैं जो आंधियों में भी अपनी लौ को ऊँचा रखते हैं,
हमें किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं।
मांग कर मिलने वाली खुशियों से हमें नफरत है,
हम अपने हिस्से का दर्द भी पूरी शान से सहते हैं।
मांग कर मिलने वाली खुशियों से हमें नफरत है,
हम अपने हिस्से का दर्द भी पूरी शान से सहते हैं।
जिस चौखट पे हमारी कद्र न हो,
हम उस रास्ते से गुज़रना भी अपनी तौहीन समझते हैं।
जिस चौखट पे हमारी कद्र न हो,
हम उस रास्ते से गुज़रना भी अपनी तौहीन समझते हैं।
हम अपनी नज़रों में कभी नहीं गिरते,
दुनिया की नज़रों में गिरना या उठना हमारे लिए मायने नहीं रखता।
हम अपनी नज़रों में कभी नहीं गिरते,
दुनिया की नज़रों में गिरना या उठना हमारे लिए मायने नहीं रखता।
इज़्ज़त दोगे तो बेपनाह इज़्ज़त पाओगे हमसे,
वरना नजरअंदाज करने में हम सबसे आगे हैं।
इज़्ज़त दोगे तो बेपनाह इज़्ज़त पाओगे हमसे,
वरना नजरअंदाज करने में हम सबसे आगे हैं।
हम किसी के टुकड़ों पे पलने वाले मुसाफ़िर नहीं हैं,
हम अपनी सूखी रोटी भी पूरे गर्व के साथ खाते हैं।
हम किसी के टुकड़ों पे पलने वाले मुसाफ़िर नहीं हैं,
हम अपनी सूखी रोटी भी पूरे गर्व के साथ खाते हैं।
जो हमें खोने के बाद हमारी कीमत समझें,
हम उनके जीवन में दोबारा लौट कर कभी नहीं जाते।
जो हमें खोने के बाद हमारी कीमत समझें,
हम उनके जीवन में दोबारा लौट कर कभी नहीं जाते।
हमारा स्वाभिमान ही हमारी सबसे बड़ी दौलत है,
और इस दौलत का कोई मोल नहीं लगा सकता।
हमारा स्वाभिमान ही हमारी सबसे बड़ी दौलत है,
और इस दौलत का कोई मोल नहीं लगा सकता।
हम शान से जीते हैं और शान से ही रुखसत होंगे,
हमारी खुद्दारी का परचम हमेशा आसमान पे लहराएगा।
हम शान से जीते हैं और शान से ही रुखसत होंगे,
हमारी खुद्दारी का परचम हमेशा आसमान पे लहराएगा।