College Friends Shayari in Hindi: कॉलेज के दिन, कैंटीन की चाय और यारों की महफ़िल पर 20 शायरी

College Friends Shayari in Hindi: कॉलेज के दिन, कैंटीन की चाय और यारों की महफ़िल पर 20 शायरी
कॉलेज का जीवन इंसान की ज़िंदगी का वह बेमिसाल मोड़ होता है जहाँ हम अपने सपनों की उड़ान भरना सीखते हैं और ऐसे दोस्त बनाते हैं जो उम्र भर के लिए हमारे दिल का हिस्सा बन जाते हैं। कैंटीन की एक कप चाय को चार दोस्तों में बांटना, क्लास बंक करके सिनेमा जाना, एग्जाम से एक रात पहले ग्रुप स्टडी के नाम पर सिर्फ गपशप करना और फेयरवेल के दिन भीगी पलकों से एक-दूसरे को अलविदा कहना—यह सब कॉलेज के जीवन को अमर बना देता है। कॉलेज फ्रेंड्स शायरी युवावस्था की उसी मस्ती, आवारगी और गहरे याराने का खूबसूरत दस्तावेज है। 'College Friends Shayari' का यह संकलन आपके कॉलेज के उन सुनहरे दिनों और बिछड़े हुए यारों की महक को फिर से आपके दिल में ताज़ा कर देगा।
कैंटीन की वो एक कप चाय और घंटों की बहसबाज़ी, कॉलेज के वो दिन ही थे जब हर दिल था राज़ी।
कैंटीन की वो एक कप चाय और घंटों की बहसबाज़ी, कॉलेज के वो दिन ही थे जब हर दिल था राज़ी।
क्लास बंक करके जो हमने शहर घूमा था, वो यारों का साथ ही ज़िंदगी का सबसे हसीन लम्हा था।
क्लास बंक करके जो हमने शहर घूमा था, वो यारों का साथ ही ज़िंदगी का सबसे हसीन लम्हा था।
एग्जाम से एक रात पहले जो ग्रुप स्टडी का ड्रामा होता था, पढ़ाई कम और यारों के किस्सों का हंगामा होता था।
एग्जाम से एक रात पहले जो ग्रुप स्टडी का ड्रामा होता था, पढ़ाई कम और यारों के किस्सों का हंगामा होता था।
असाइनमेंट कॉपी करने में जो महारत हासिल थी हमें, कॉलेज के यारों संग हर मुश्किल आसान लगती थी हमें।
असाइनमेंट कॉपी करने में जो महारत हासिल थी हमें, कॉलेज के यारों संग हर मुश्किल आसान लगती थी हमें।
कॉलेज का वो फेयरवेल और आँखों में ठहरे हुए वो आंसू, जब समझ आया कि अब बिखर जाएगा यह खूबसूरत काफिला।
कॉलेज का वो फेयरवेल और आँखों में ठहरे हुए वो आंसू, जब समझ आया कि अब बिखर जाएगा यह खूबसूरत काफिला।
वो हॉस्टल के कमरों में देर रात तक जागना, और सुबह की पहली क्लास के लिए भागमभाग करना।
वो हॉस्टल के कमरों में देर रात तक जागना, और सुबह की पहली क्लास के लिए भागमभाग करना।
पॉकेट मनी भले ही कम थी उस दौर में हमारे पास, मगर यारों के साथ बिताया हर लम्हा था बेहद खास।
पॉकेट मनी भले ही कम थी उस दौर में हमारे पास, मगर यारों के साथ बिताया हर लम्हा था बेहद खास।
आज बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में भी वो स्वाद नहीं मिलता, जो कॉलेज की कैंटीन के समोसों में मिला करता था।
आज बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में भी वो स्वाद नहीं मिलता, जो कॉलेज की कैंटीन के समोसों में मिला करता था।
वो किसी एक के क्रश को पूरे कॉलेज में मशहूर कर देना, और फिर उसके नाम पे सारे ग्रुप का ज़ोर-ज़ोर से हँसना।
वो किसी एक के क्रश को पूरे कॉलेज में मशहूर कर देना, और फिर उसके नाम पे सारे ग्रुप का ज़ोर-ज़ोर से हँसना।
कॉलेज के वो यार ही थे जिन्होंने ज़िंदगी के फलसफे सिखाए, किताबों से ज्यादा उन्होंने हमें जीने के रास्ते दिखाए।
कॉलेज के वो यार ही थे जिन्होंने ज़िंदगी के फलसफे सिखाए, किताबों से ज्यादा उन्होंने हमें जीने के रास्ते दिखाए।
आज सब अपनी-अपनी नौकरियों और शहरों में मशगूल हैं, मगर कॉलेज के वो दिन आज भी दिल के सबसे करीब हैं।
आज सब अपनी-अपनी नौकरियों और शहरों में मशगूल हैं, मगर कॉलेज के वो दिन आज भी दिल के सबसे करीब हैं।
वो फेस्ट की रातें और स्टेज पे मचाया हुआ धमाल, कॉलेज के वो चार साल सचमुच थे बड़े बेमिसाल।
वो फेस्ट की रातें और स्टेज पे मचाया हुआ धमाल, कॉलेज के वो चार साल सचमुच थे बड़े बेमिसाल।
एक दोस्त की गाड़ी और पूरा ग्रुप सवार होता था, वो बेपरवाह जवानी का सबसे खूबसूरत खुमार होता था।
एक दोस्त की गाड़ी और पूरा ग्रुप सवार होता था, वो बेपरवाह जवानी का सबसे खूबसूरत खुमार होता था।
जब भी कॉलेज के पुराने फोटो एलबम को पलटते हैं, हर तस्वीर में अपने वही पुराने पागल यार हँसते दिखते हैं।
जब भी कॉलेज के पुराने फोटो एलबम को पलटते हैं, हर तस्वीर में अपने वही पुराने पागल यार हँसते दिखते हैं।
काश कि वो कॉलेज का दौर कभी खत्म ही न होता, और हम कभी अपनी इस यारी से दूर न होते।
काश कि वो कॉलेज का दौर कभी खत्म ही न होता, और हम कभी अपनी इस यारी से दूर न होते।
वो प्रॉक्सी लगाने का हुनर और पकड़े जाने का डर, कितना प्यारा था वो कॉलेज के गलियारों का सफर।
वो प्रॉक्सी लगाने का हुनर और पकड़े जाने का डर, कितना प्यारा था वो कॉलेज के गलियारों का सफर।
आज भी जब कोई पुराना कॉलेज का गाना बजता है, दिल फिर से उसी कैंटीन की टेबल पे जा बैठता है।
आज भी जब कोई पुराना कॉलेज का गाना बजता है, दिल फिर से उसी कैंटीन की टेबल पे जा बैठता है।
डिग्रियां तो मिल गईं और हम कामयाब भी हो गए, मगर कॉलेज के वो अनमोल यार कहीं पीछे छूट गए।
डिग्रियां तो मिल गईं और हम कामयाब भी हो गए, मगर कॉलेज के वो अनमोल यार कहीं पीछे छूट गए।
जब भी मिलते हैं आज भी वही कॉलेज वाला पागलपन जाग उठता है, उम्र चाहे जितनी बढ़ जाए, याराना कभी बूढ़ा नहीं होता।
जब भी मिलते हैं आज भी वही कॉलेज वाला पागलपन जाग उठता है, उम्र चाहे जितनी बढ़ जाए, याराना कभी बूढ़ा नहीं होता।
सदा सलामत रहें वो सारे कॉलेज के जिगरी यार, जिन्होंने मेरी जवानी को बना दिया सबसे यादगार।
सदा सलामत रहें वो सारे कॉलेज के जिगरी यार, जिन्होंने मेरी जवानी को बना दिया सबसे यादगार।
Text copied to clipboard!