School Friends Shayari in Hindi: स्कूल के सुनहरे दिन, टिफिन और पुरानी यादों पर 20 भावुक शायरी

School Friends Shayari in Hindi: स्कूल के सुनहरे दिन, टिफिन और पुरानी यादों पर 20 भावुक शायरी
स्कूल के दिन इंसान की ज़िंदगी का वह सबसे मासूम और सुनहरा दौर होते हैं जहाँ न कोई फिक्र थी, न कोई जिम्मेदारी, बस दोस्तों के साथ खिलखिलाना और मस्ती करना ही ज़िंदगी थी। घंटी बजते ही टिफिन पर टूट पड़ना, लास्ट बेंच पर बैठकर हंसी-मज़ाक करना, बारिश में कागज़ की कश्तियाँ चलाना और टीचर की डांट साथ मिलकर खाना—ये वो अनमोल यादें हैं जो उम्र भर सीने में महकती रहती हैं। स्कूल फ्रेंड्स शायरी बचपन के उसी बेपरवाह याराने और स्कूल के गलियारों की सुनहरी यादों का खूबसूरत आइना है। 'School Friends Shayari' का यह संग्रह आपको एक बार फिर अपने स्कूल के उन प्यारे दोस्तों की याद दिला देगा और आपकी आँखों में बचपन की नमी ला देगा।
वो स्कूल की घंटी और दोस्तों का शोर शराबा, याद आता है वो बचपन का सबसे हसीन ज़माना।
वो स्कूल की घंटी और दोस्तों का शोर शराबा, याद आता है वो बचपन का सबसे हसीन ज़माना।
लंच ब्रेक होने से पहले ही टिफिन खत्म कर देना, कितना प्यारा था वो बिना वजह दोस्तों पे हक जताना।
लंच ब्रेक होने से पहले ही टिफिन खत्म कर देना, कितना प्यारा था वो बिना वजह दोस्तों पे हक जताना।
लास्ट बेंच पे बैठकर जो हमने सपने बुने थे, वो स्कूल के दिन ही ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पन्ने थे।
लास्ट बेंच पे बैठकर जो हमने सपने बुने थे, वो स्कूल के दिन ही ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पन्ने थे।
होमवर्क न करने पे जब साथ में मुर्गा बनते थे, तकलीफ़ में भी हम एक-दूसरे को देखकर हँसते थे।
होमवर्क न करने पे जब साथ में मुर्गा बनते थे, तकलीफ़ में भी हम एक-दूसरे को देखकर हँसते थे।
बारिश के पानी में वो कागज़ की नाव तैराना, कहाँ खो गया वो बेफिक्र बचपन और वो पुराना याराना।
बारिश के पानी में वो कागज़ की नाव तैराना, कहाँ खो गया वो बेफिक्र बचपन और वो पुराना याराना।
पेंसिल की नोक टूटने पे भी जो जंग छिड़ जाती थी, मगर शाम ढलते ही फिर से वही दोस्ती रंग लाती थी।
पेंसिल की नोक टूटने पे भी जो जंग छिड़ जाती थी, मगर शाम ढलते ही फिर से वही दोस्ती रंग लाती थी।
टीचर के क्लास से बाहर जाते ही जो महफ़िल सजती थी, कमरे की हर दीवार हमारे ठहाकों से गूंजती थी।
टीचर के क्लास से बाहर जाते ही जो महफ़िल सजती थी, कमरे की हर दीवार हमारे ठहाकों से गूंजती थी।
आज लाखों की गाड़ियाँ हैं मगर वो खुशी नहीं मिलती, जो स्कूल की पुरानी साइकिल पे दोस्तों संग मिलती थी।
आज लाखों की गाड़ियाँ हैं मगर वो खुशी नहीं मिलती, जो स्कूल की पुरानी साइकिल पे दोस्तों संग मिलती थी।
वो एग्जाम के दिनों में एक-दूसरे को सब कुछ समझाना, और रिजल्ट आने पे साथ मिलकर खुशियाँ मनाना।
वो एग्जाम के दिनों में एक-दूसरे को सब कुछ समझाना, और रिजल्ट आने पे साथ मिलकर खुशियाँ मनाना।
कंधों पे बस्ते का बोझ था मगर दिल बिल्कुल हल्का था, वो स्कूल के दोस्तों का साथ हर ग़म से बेपरवाह था।
कंधों पे बस्ते का बोझ था मगर दिल बिल्कुल हल्का था, वो स्कूल के दोस्तों का साथ हर ग़म से बेपरवाह था।
आज सब अपनी-अपनी मंज़िलों की दौड़ में खो गए, जो कभी एक साथ हँसते थे, आज अजनबी से हो गए।
आज सब अपनी-अपनी मंज़िलों की दौड़ में खो गए, जो कभी एक साथ हँसते थे, आज अजनबी से हो गए।
वो स्कूल का मैदान और वो खेल के पीरियड का इंतज़ार, कहाँ मिलेगा फिर से वो मासूम और सच्चा प्यार।
वो स्कूल का मैदान और वो खेल के पीरियड का इंतज़ार, कहाँ मिलेगा फिर से वो मासूम और सच्चा प्यार।
एक बोतल से पानी पीने में जो अपनापन था, वो सिर्फ और सिर्फ हमारे स्कूल का प्यारा बचपन था।
एक बोतल से पानी पीने में जो अपनापन था, वो सिर्फ और सिर्फ हमारे स्कूल का प्यारा बचपन था।
ग्रुप फोटो में जो चेहरे आज मुस्कुरा रहे हैं अलमारी में, वो मेरी ज़िंदगी की सबसे कीमती जमापूंजी हैं।
ग्रुप फोटो में जो चेहरे आज मुस्कुरा रहे हैं अलमारी में, वो मेरी ज़िंदगी की सबसे कीमती जमापूंजी हैं।
काश कि वक़्त का पहिया एक बार फिर पीछे घूम जाए, और हम सब फिर से उसी स्कूल की क्लास में बैठ जाएं।
काश कि वक़्त का पहिया एक बार फिर पीछे घूम जाए, और हम सब फिर से उसी स्कूल की क्लास में बैठ जाएं।
वो बिना बात के झगड़ना और फिर अगले ही पल मान जाना, कितना सच्चा था स्कूल के यारों का वो अफसाना।
वो बिना बात के झगड़ना और फिर अगले ही पल मान जाना, कितना सच्चा था स्कूल के यारों का वो अफसाना।
आज भी जब स्कूल की पुरानी यूनिफॉर्म पे नज़र पड़ती है, आँखों में आँसू और होठों पे एक प्यारी सी मुस्कान खिलती है।
आज भी जब स्कूल की पुरानी यूनिफॉर्म पे नज़र पड़ती है, आँखों में आँसू और होठों पे एक प्यारी सी मुस्कान खिलती है।
छुट्टी की घंटी बजते ही वो बेतहाशा दौड़ लगाना, याद आता है वो मासूमियत भरा खूबसूरत ज़माना।
छुट्टी की घंटी बजते ही वो बेतहाशा दौड़ लगाना, याद आता है वो मासूमियत भरा खूबसूरत ज़माना।
स्कूल के वो यार आज भी दिल के सबसे करीब हैं, जिन्होंने मुझे ज़िंदगी जीने का असली सलीका सिखाया।
स्कूल के वो यार आज भी दिल के सबसे करीब हैं, जिन्होंने मुझे ज़िंदगी जीने का असली सलीका सिखाया।
सदा सलामत रहें वो सारे स्कूल के बचपन के यार, जिनके दम पे महकता था हमारा वो मासूम संसार।
सदा सलामत रहें वो सारे स्कूल के बचपन के यार, जिनके दम पे महकता था हमारा वो मासूम संसार।
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