Killer Attitude Shayari in Hindi: तीखे तेवर और कातिलाना अंदाज़ पर 20 बेमिसाल शायरी

Killer Attitude Shayari in Hindi: तीखे तेवर और कातिलाना अंदाज़ पर 20 बेमिसाल शायरी
कातिलाना अंदाज़ वह तेवर है जो बिना एक भी अपशब्द बोले सामने वाले को उसकी औकात याद दिला देता है। जब आपके बोलने में धार, नज़रों में चमक और फैसलों में बेबाकी होती है, तो विरोधी खुद-ब-खुद आपके रास्ते से हट जाते हैं। तीखा एटीट्यूड किसी पर हावी होने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सीमाओं को स्पष्ट करने और खुद को हल्का समझने वालों को करारा जवाब देने के लिए होता है। किलर एटीट्यूड शायरी उन लोगों की पसंदीदा है जो हर बात का जवाब मुंह से देने के बजाय अपने अंदाज़ और कामयाबी से देना जानते हैं। 'Killer Attitude Shayari' का यह संकलन उन तीखे, चुनिंदा और बेमिसाल अश'आर से सजाया गया है जो आपके तेवर को एक नया और बेख़ौफ़ मुकाम देंगे।
हमारी नज़रों का वार इतना सटीक होता है, कि सामने वाले का गुरूर पल भर में ढेर हो जाता है।
हमारी नज़रों का वार इतना सटीक होता है, कि सामने वाले का गुरूर पल भर में ढेर हो जाता है।
हमसे मुकाबला करने की सोच भी मत रखना, क्योंकि हम वो खेल खेलते हैं जिसमें जीत तय होती है।
हमसे मुकाबला करने की सोच भी मत रखना, क्योंकि हम वो खेल खेलते हैं जिसमें जीत तय होती है।
आग लगाने वालों को क्या खबर हमारे मिज़ाज की, हम वो हवा हैं जो तूफानों का रुख मोड़ देती है।
आग लगाने वालों को क्या खबर हमारे मिज़ाज की, हम वो हवा हैं जो तूफानों का रुख मोड़ देती है।
पीठ पीछे भौंकने वालों को हम मुड़कर नहीं देखते, क्योंकि शेरों का शिकार हमेशा सामने से होता है।
पीठ पीछे भौंकने वालों को हम मुड़कर नहीं देखते, क्योंकि शेरों का शिकार हमेशा सामने से होता है।
दुश्मनों की गिनती हम कभी नहीं करते जनाब, क्योंकि हमारे एक ही वार से महफ़िलें साफ़ हो जाती हैं।
दुश्मनों की गिनती हम कभी नहीं करते जनाब, क्योंकि हमारे एक ही वार से महफ़िलें साफ़ हो जाती हैं।
हमारा अंदाज़ ही कुछ ऐसा कातिलाना है, कि देखने वाले कायल और जलने वाले राख हो जाते हैं।
हमारा अंदाज़ ही कुछ ऐसा कातिलाना है, कि देखने वाले कायल और जलने वाले राख हो जाते हैं।
जो हमें गिराने की साज़िशें रचते हैं दिन-रात, उन्हें क्या पता कि हम उड़ने का हुनर रखते हैं।
जो हमें गिराने की साज़िशें रचते हैं दिन-रात, उन्हें क्या पता कि हम उड़ने का हुनर रखते हैं।
बात तमीज़ से करोगे तो जान भी हाज़िर है, वरना औकात दिखाने में हमें एक सेकंड भी नहीं लगता।
बात तमीज़ से करोगे तो जान भी हाज़िर है, वरना औकात दिखाने में हमें एक सेकंड भी नहीं लगता।
हम वो ज़हर हैं जिसे पीने की हिम्मत हर किसी में नहीं, और वो नशा हैं जो एक बार चढ़ जाए तो उतरता नहीं।
हम वो ज़हर हैं जिसे पीने की हिम्मत हर किसी में नहीं, और वो नशा हैं जो एक बार चढ़ जाए तो उतरता नहीं।
हमारी मौजूदगी ही विरोधियों के लिए खौफ का सबब है, हमें हथियार उठाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ती।
हमारी मौजूदगी ही विरोधियों के लिए खौफ का सबब है, हमें हथियार उठाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ती।
हमसे जलने वाले भी कमाल का काम करते हैं, मुफ्त में ही सही, हमारे नाम का प्रचार करते हैं।
हमसे जलने वाले भी कमाल का काम करते हैं, मुफ्त में ही सही, हमारे नाम का प्रचार करते हैं।
कातिल हमारी आँखें हैं और तीखी हमारी ज़ुबान, हमसे टकराने वाले अक्सर भूल जाते हैं अपना मकान।
कातिल हमारी आँखें हैं और तीखी हमारी ज़ुबान, हमसे टकराने वाले अक्सर भूल जाते हैं अपना मकान।
जो हमसे उलझने की गलती करते हैं एक बार, वो दोबारा अपनी औकात से बाहर झांकने की हिम्मत नहीं करते।
जो हमसे उलझने की गलती करते हैं एक बार, वो दोबारा अपनी औकात से बाहर झांकने की हिम्मत नहीं करते।
हम वो ख़्वाब हैं जो हर किसी को नसीब नहीं होते, और वो हकीकत हैं जिसे झुठलाना नामुमकिन है।
हम वो ख़्वाब हैं जो हर किसी को नसीब नहीं होते, और वो हकीकत हैं जिसे झुठलाना नामुमकिन है।
तेवर हमारे वही पुराने हैं बस अंदाज़ बदल गया है, अब हम जवाब लफ़्ज़ों से नहीं, खामोशी से देते हैं।
तेवर हमारे वही पुराने हैं बस अंदाज़ बदल गया है, अब हम जवाब लफ़्ज़ों से नहीं, खामोशी से देते हैं।
जो हमें नफरत की निगाह से देखते हैं, हम उनकी नज़रों को अपनी कामयाबी से अंधा कर देते हैं।
जो हमें नफरत की निगाह से देखते हैं, हम उनकी नज़रों को अपनी कामयाबी से अंधा कर देते हैं।
हम अपनी शर्तों पर जीते हैं और अपनी मर्ज़ी से मरते हैं, दुनियादारी के ठेकेदारों की हम परवाह नहीं करते।
हम अपनी शर्तों पर जीते हैं और अपनी मर्ज़ी से मरते हैं, दुनियादारी के ठेकेदारों की हम परवाह नहीं करते।
हमसे बैर रखने वालों का एक ही हश्र होता है, या तो वो सुधर जाते हैं या फिर रास्ते से हट जाते हैं।
हमसे बैर रखने वालों का एक ही हश्र होता है, या तो वो सुधर जाते हैं या फिर रास्ते से हट जाते हैं।
हमारा वक्त आएगा नहीं, हम खुद अपना वक्त लाएंगे, और जब आएंगे तो पुराने सारे हिसाब चुकता कर जाएंगे।
हमारा वक्त आएगा नहीं, हम खुद अपना वक्त लाएंगे, और जब आएंगे तो पुराने सारे हिसाब चुकता कर जाएंगे।
कातिल हमारा मुस्कुराना ही काफी है ज़माने के लिए, हथियार तो कमज़ोर लोग उठाया करते हैं।
कातिल हमारा मुस्कुराना ही काफी है ज़माने के लिए, हथियार तो कमज़ोर लोग उठाया करते हैं।
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