Royal Attitude Shayari in Hindi: नवाबी अंदाज़ और खानदानी रुतबे पर 20 धाकड़ शायरी

Royal Attitude Shayari in Hindi: नवाबी अंदाज़ और खानदानी रुतबे पर 20 धाकड़ शायरी
रॉयल अंदाज़ किसी दिखावे, महँगी गाड़ियों या झूठी शान-शौकत का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान के संस्कारों, उसकी चाल-ढाल और उसकी खामोशी के दबदबे में झलकता है। खानदानी रईसी वह होती है जो चेहरे पर शांत मुस्कान और बातों में वज़न रखती है। जो लोग वाकई ऊंचे मुकाम पर होते हैं, वे कभी अपनी तारीफ खुद नहीं करते, बल्कि उनका काम और उनका वजूद खुद बोलता है। रॉयल एटीट्यूड शायरी उन लोगों के लिए है जो ज़िंदगी को अपनी शर्तों पर, पूरी गरिमा और नवाबी ठाठ के साथ जीना पसंद करते हैं। इस संकलन में हमने उसी खानदानी शान, बड़प्पन और गरिमामयी तेवर को खूबसूरत शब्दों में पिरोया है। 'Royal Attitude Shayari' का यह संग्रह आपके सोशल मीडिया स्टेटस और व्यक्तित्व को एक अलग ही बुलंदी बख्शेगा।
हमारी खामोशी को हमारी बेबसी मत समझना, हम जब भी बोलते हैं, महफ़िलों के मिज़ाज बदल देते हैं।
हमारी खामोशी को हमारी बेबसी मत समझना, हम जब भी बोलते हैं, महफ़िलों के मिज़ाज बदल देते हैं।
खानदानी तहज़ीब है हमारी रगों में साहिब, हम झुकते भी वहीं हैं जहाँ उसूलों की बात होती है।
खानदानी तहज़ीब है हमारी रगों में साहिब, हम झुकते भी वहीं हैं जहाँ उसूलों की बात होती है।
दौलत तो कोई भी कमा सकता है इस दौर में, मगर नाम और रुतबा कमाने में पुश्तें गुज़र जाती हैं।
दौलत तो कोई भी कमा सकता है इस दौर में, मगर नाम और रुतबा कमाने में पुश्तें गुज़र जाती हैं।
हम महफ़िलों के मोहताज नहीं अपनी पहचान के लिए, हम जहाँ खड़े होते हैं, क़तारें वहीं से शुरू होती हैं।
हम महफ़िलों के मोहताज नहीं अपनी पहचान के लिए, हम जहाँ खड़े होते हैं, क़तारें वहीं से शुरू होती हैं।
बात अगर इज़्ज़त की आ जाए तो हम तख़्त भी छोड़ देते हैं, हम वो नवाबी मिज़ाज रखते हैं जो किसी के आगे नहीं झुकते।
बात अगर इज़्ज़त की आ जाए तो हम तख़्त भी छोड़ देते हैं, हम वो नवाबी मिज़ाज रखते हैं जो किसी के आगे नहीं झुकते।
हमारी सादगी में भी एक अलग ही जलवा है, लोग सूट-बूट पहनकर भी वो शान नहीं ला पाते।
हमारी सादगी में भी एक अलग ही जलवा है, लोग सूट-बूट पहनकर भी वो शान नहीं ला पाते।
जो हमें पसंद करते हैं उनका शुक्रिया, और जो नहीं करते, उनकी पसंद अभी हमारे दर्जे की नहीं।
जो हमें पसंद करते हैं उनका शुक्रिया, और जो नहीं करते, उनकी पसंद अभी हमारे दर्जे की नहीं।
रास्ते चाहे कितने भी पथरीले और तंग क्यों न हों, हमारी चाल में हमेशा वही पुराना नवाबीपन रहता है।
रास्ते चाहे कितने भी पथरीले और तंग क्यों न हों, हमारी चाल में हमेशा वही पुराना नवाबीपन रहता है।
हम नज़रों से वो तीर चलाते हैं जनाब, कि अच्छे-अच्छे मगरूरों का गुरूर खाक हो जाता है।
हम नज़रों से वो तीर चलाते हैं जनाब, कि अच्छे-अच्छे मगरूरों का गुरूर खाक हो जाता है।
ताल्लुक़ात हम सबसे अदब से रखते हैं, मगर बराबरी का दर्जा सिर्फ औकात वालों को देते हैं।
ताल्लुक़ात हम सबसे अदब से रखते हैं, मगर बराबरी का दर्जा सिर्फ औकात वालों को देते हैं।
हमारी शख्सियत को समझना हर किसी के बस की बात नहीं, हम वो किताब हैं जो सिर्फ सलीके वालों को समझ आती है।
हमारी शख्सियत को समझना हर किसी के बस की बात नहीं, हम वो किताब हैं जो सिर्फ सलीके वालों को समझ आती है।
न हम किसी की नक़ल करते हैं, न किसी से जलते हैं, हम अपने बनाए उसूलों पे पूरी शान से चलते हैं।
न हम किसी की नक़ल करते हैं, न किसी से जलते हैं, हम अपने बनाए उसूलों पे पूरी शान से चलते हैं।
शौक भले ही हमारे महँगे न हों इस ज़माने में, मगर हमारे उसूल हमेशा सबसे आला दर्जे के होते हैं।
शौक भले ही हमारे महँगे न हों इस ज़माने में, मगर हमारे उसूल हमेशा सबसे आला दर्जे के होते हैं।
दिखावे की भीड़ का हिस्सा बनना हमारी फ़ितरत नहीं, हम अकेले ही काफी हैं महफ़िल की शान बढ़ाने के लिए।
दिखावे की भीड़ का हिस्सा बनना हमारी फ़ितरत नहीं, हम अकेले ही काफी हैं महफ़िल की शान बढ़ाने के लिए।
जब वक्त हमारा इम्तिहान लेता है तो हम घबराते नहीं, क्योंकि हम जानते हैं कि जीत हमेशा सब्र वालों की होती है।
जब वक्त हमारा इम्तिहान लेता है तो हम घबराते नहीं, क्योंकि हम जानते हैं कि जीत हमेशा सब्र वालों की होती है।
इश्क़ भी किया तो बड़ी नफ़ासत और वफ़ा से किया, हम वो नहीं जो हर मोड़ पे अपनी पसंद बदलते फिरें।
इश्क़ भी किया तो बड़ी नफ़ासत और वफ़ा से किया, हम वो नहीं जो हर मोड़ पे अपनी पसंद बदलते फिरें।
हमारे तेवर देखकर लोग अक्सर रास्ते बदल लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि हम कभी किसी से दबते नहीं।
हमारे तेवर देखकर लोग अक्सर रास्ते बदल लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि हम कभी किसी से दबते नहीं।
जो हमें खो देते हैं वो ताउम्र पछताते हैं, क्योंकि हमारे जैसा वफ़ादार और खुद्दार दोबारा नहीं मिलता।
जो हमें खो देते हैं वो ताउम्र पछताते हैं, क्योंकि हमारे जैसा वफ़ादार और खुद्दार दोबारा नहीं मिलता।
हम ज़माने के साथ नहीं, अपने अंदाज़ के साथ चलते हैं, तभी तो लोग हमारे नक्श-ए-कदम की मिसालें देते हैं।
हम ज़माने के साथ नहीं, अपने अंदाज़ के साथ चलते हैं, तभी तो लोग हमारे नक्श-ए-कदम की मिसालें देते हैं।
रुतबा हमारा कल भी वही था और आज भी वही रहेगा, क्योंकि हम ताज के नहीं, अपने किरदार के दम पे जीते हैं।
रुतबा हमारा कल भी वही था और आज भी वही रहेगा, क्योंकि हम ताज के नहीं, अपने किरदार के दम पे जीते हैं।
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